जोधपुरा संघर्ष समिति ने 20 फरवरी 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की. विज्ञप्ति के अनुसार जोधपुरा संघर्ष समिति के लोग 20 फरवरी 2026 को एसडीएम कार्यालय कोटपुतली, पहुंचे ओर एसडीएम को ज्ञापन देकर बताया और कि ग्रामीण, जयपुर पैदल कूच के लिए ,दिनांक 22-2-2026 से अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के गेट नं 2 से सुबह 11बजे धरनार्थी प्रस्थान करेंगे। मांग की है कि जयपुर कूच के दौरान रास्ते में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु पर्याप्त पुलिस बल, मेडिकल सुविधा, पेयजल व्यवस्था एवं शुलभ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की कृपा करें.
( जोधपुरा में माइनिंग साईट- साभार द
हिन्दू )
तीन साल से ज़्यादा समय से हर दिन, जयपुर से लगभग 100 Km दूर, उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कोटपुतली-बहरोर जिले के जोधपुरा गांव के लोग सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक एक छोटे से मैदान में इकट्ठा होते हैं।
मोहनपुरा और जोधपुरा गांव अल्ट्राटेक सीमेंट
प्लांट से 500 मीटर से भी कम दूरी पर हैं।
गांव वालों का कहना है कि माइनिंग ने उनकी ज़िंदगी नरक बना दी है।
गांव के रहने वाले और समिति के सचिव कैलाश यादव
कहते हैं, “हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम
यह है कि हमारे घरों के इतने पास हो रही ब्लास्टिंग की वजह से हमारी दीवारों में
दरारें आ गई हैं; वे कभी भी गिर सकती हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि “दूसरा प्लांट 2023 में हमारे गांव के बहुत
पास खुला, और उसके स्टोन क्रशर रहने
वाले इलाके से 82 मीटर की दूरी पर हैं। स्टोन
क्रशिंग से निकलने वाली धूल की वजह से लोगों को सांस लेने में गंभीर दिक्कतें और
सेहत से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो रही हैं।
“सबसे बुरी बात यह है कि उन्होंने इतनी गहरी माइनिंग की है
कि ग्राउंडवाटर खत्म हो गया है और गांव में ग्राउंडवाटर मिलना बंद हो गया है।
उन्होंने आगे कहा, “हमें टैंकरों से पानी
खरीदने के लिए 500 रुपये देने पड़ते हैं, क्योंकि पीने के पानी की
बहुत कमी है।”
ग्रामीण महीनो से एक पतली सड़क पर
ओवरलोडेड डंपर ट्रकों के चलने के खिलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे हैं। ये ट्रक अल्ट्रा
प्राइम इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के लिए पत्थर ले जाते हैं।
जब भी कोई ओवरलोडेड ट्रक सड़क के इस पतले हिस्से में आता है, तो प्रोटेस्टर में से कोई एक, जो आमतौर पर छोटा होता है, सड़क के बीच में आता है, ट्रक के सामने खड़ा हो जाता है और उसे वापस जाने के लिए कहता है।
कई अपील और विरोध के बाद, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट ने सड़क के मुहाने पर एक साइनबोर्ड लगा दिया, जिससे भारी ट्रक सड़क पर नहीं आ सकते थे। कुछ लोग तो फिर भी घुस जाते हैं, और गांव वाले चौबीसों घंटे पहरा देते हैं ताकि ट्रक न गुज़रें।
अल्ट्राटेक का जो बेकार खराब पत्थर है उसको भी गांव कांसली -शुक्लावास की सकरी सड़क से कम्पनी के ट्रकों दुआरा परिवहन किया जा रहा है। इसके विरोध में भी गांव कासली में 52 दिनो से धरना चल रहा है। जहां भयंकर सर्दी में महिला पुरुष रात-दिन इसके ट्रकों की चौकसी करते हैं।
उनका ज़्यादातर दिन डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करने, पिटीशन पर साइन करने, खूब चाय पीने और बीच-बीच
में एक-दूसरे से मिलने में बीतता है। कभी-कभी अपना जोश बनाए रखने के लिए वे एक साथ
नारे लगाते हैं। जब भी कोई अनाउंसमेंट या कोई खबर होती है, तो कोई एक आदमी
माइक्रोफोन पर अनाउंस करता है। गांव वाले अपने घरों से निकलकर लगभग तुरंत मैदान
में जमा हो जाते हैं।
गांव वाले प्रोटेस्ट वाली जगह से आते-जाते रहते
हैं। रात में, वे एक खाली दुकान में
गद्दे बिछा देते हैं, जहाँ प्रोटेस्टर
बारी-बारी से सोते हैं, जबकि बाकी लोग पहरा देते
हैं। कुछ दिन, सब लोग प्रोटेस्ट वाली
जगह पर एक साथ खाना खाते हैं, तो कुछ दिन वे वापस आने से पहले घर जाकर खाना खाते हैं।
NGT ने इलाके में एनवायरनमेंटल डैमेज और हेल्थ से जुड़े खतरों
के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को ज़िम्मेदार ठहराया। अधिकारियों ने गांव वालों
से ट्रकों के लिए कोई हल या दूसरा रास्ता खोजने के लिए एक महीने का समय मांगा है, लेकिन गांव वाले, खासकर पर्यावरणविद और
एक्टिविस्ट राधेश्याम शुक्लावास, इस पर राज़ी नहीं हैं।
राष्ट्रीय हरित
अधिकरण (NGT) का पारित आदेश
जोधपुरा संघर्ष
समिति (मोहनपुरा) के सचिव कैलाश यादव व राधेश्याम शुक्लावास ने बताया कि
अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के विरुद्ध माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)
में प्रकरण
संख्या 143/2024
(CZ) दायर किया गया था, जिसमें दिनांक 03-11-2025
को माननीय NGT
द्वारा प्लांट
के विरुद्ध आदेश पारित किया गया। उक्त आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करने का
उत्तरदायित्व जिला कलेक्टर, कोटपुतली-बहरोड़ को सौंपा गया था तथा अक्षरशः
पालना हेतु 3 माह की समय सीमा निर्धारित की गई थी।
किन्तु अत्यंत खेद का विषय है कि दिनांक 18-02-2026
तक भी माननीय NGT
के आदेश की
पालना नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर
प्रश्नचिन्ह खड़े किये गये।
माननीय NGT के आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया
गया है कि:
आबादी, स्कूल एवं मंदिर से 500 मीटर की परिधि में ब्लास्टिंग नहीं की जाएगी।
जोधपुरा गांव के घरों में अल्ट्राटेक सीमेंट
प्लांट की खदानों में की गई ब्लास्टिंग से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित
ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाएगा।
खदानों से उड़ने वाली धूल एवं प्रदूषण से
प्रभावित ग्रामीणों को स्वास्थ्य हानि के लिए मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास हेतु एक
समिति का गठन किया जाएगा।
किन्तु उपरोक्त बिंदुओं की
पालना आज दिनांक तक नहीं की गई है। इस कारण ग्रामीणों में अत्यंत आक्रोश एवं
निराशा व्याप्त है। ग्रामीण पिछले 1168 दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे
हुए हैं,
परंतु अभी तक
न्याय नहीं मिल पाया है।
अब विवश होकर जोधपुरा संघर्ष समिति (मोहनपुरा) एवं समस्त
ग्रामीण दिनांक 22 फरवरी 2026 से जयपुर कके लिए कूच करने का निर्णय धरना कमेटी ने लिया।
ग्रामीण पैदल चल कर 25 फरवरी 2026 को जयपुर पहुँच कर विधानसभा जायेंगे और
मुख्यमंत्री महोदय से मिल कर अपनी समस्याओ और अल्ट्राटेक की तानाशाही व जिला
कोटपुतली बहरोड़ के प्रशासन की निष्क्रियता को राज्य के राजनेतिक और प्रशासनिक
नेत्रत्व को बताया जा सके ।
अधिक
जानकारी,समस्या की समझ और सहायता देने के लिए आप जोधपुरा संघर्ष समिति (मोहनपुरा) के सचिव कैलाश
यादव (9950412300) और सदस्य राधेश्याम शुक्लावास ( 9829778227) से संपर्क कर सकते हैं .
(सन्दर्भ /साभार - जोधपुरा संघर्ष समिति का प्रेस नोट,The Telegraph ,The hindu)
धरती पानी से संबंधित सूचनाओ, समाचारों और सन्दर्भों का संकलन–पानी पत्रक पानी पत्रक292(21फरवरी2026)जलधाराअभियान,221,पत्रकार्कॉलोनी,जयपुर- राजस्थान,302020,संपर्क उपेन्द्र शंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



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