सोमवार, 27 मार्च 2023

भारत की बोतल बंद पानी इंडस्ट्री पर एक नजर

 

भारत की बोतल बंद पानी इंडस्ट्री पर एक नजर

1.    औसत घरेलू पानी (ड्रिंकिंग वाटर, इसमें शामिल है) की मांग 2000 में 85 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (एलपीसीडी) से बढ़कर क्रमशः 2025 और 2050 तक 125 एलपीसीडी और 170 एलपीसीडी हो जाएगी।

2.    बोतल बंद पानी की बिक्री में बडोतरी- ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसारए भारत में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बॉटल का बाजार 2020 में 36000 करोड़ रूपये का आँका गया था ,अब  2023 के अंत तक इसके 60 बिलियन डॉलर यानि 60000 करोड़ रुपए (एक्सचेंज @82.39 रु) तक पहुंचने की उम्मीद है .


3.    अनुसंधान और विश्लेषण फर्म स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भारत की वार्षिक बोतलबंद पानी की खपत 23,605 मिलियन लीटर थी, जो 2026 तक 27,444.7 मिलियन लीटर तक पहुंच जाएगी। ये आंकडे खपत के हैं और इस में बिना बिका माल शामिल नहीं है।

4.    22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस पर  जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से पता चलता है। भारत मूल्य के हिसाब से बोतलबंद पानी का 12वां सबसे बड़ा और 2021 में मात्रा के हिसाब से 14वां सबसे बड़ाउपभोक्ता था।

5.    यह पानी पीता कौन है- 2019 में अनुमान लगाया गया कि 12.2 प्रतिशत, शहरी परिवार अपनी पीने के पानी की जरूरतों के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं, जो 10 साल पहले 2.7 प्रतिशत था। बाहर से आने वाले टूरिस्टों की बड़ती संख्या इस में शामिल नहीं है जबकि वो भी बोतल बन्द पानी  को ही प्राथमिकता देते है।  

6.    रिटेलर का प्रॉफिट मार्जिन 30 से 55  प्रतिशत  प्रति बोतल होता है ।

7.    भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के साथ पंजीकृत, पैकेज्ड पेयजल में कारोबार करने के लिए 6,000 से अधिक लाइसेंसशुदा बॉटलर्स हैं। इस संख्या में गैर - ब्रांडेड और अपंजीकृत बॉटलर्स शामिल नहीं हैं।

8.    प्रमुख ब्रांड्स- बिसलेरी ,किनले ,अकुँफिना ,बेली,हिमालयन ,किंगफ़िशर ,क़ुआ ,मानिकचंद ओक्स्यरीच,टाटा वाटर प्लस ,रेल नीर , भारतीय बाज़ार के प्रमुख ब्रांड्स हैं .

9. बाज़ार में कंपनियों की हिस्सेदारी &


10.  बोतलों के वज़न के अनुसार बाज़ार मे हिस्सेदारी (2018) &


 

 11.  2015 के बाद भिन्न भिन्न  स्वादो मे  भी बोतल बंद पानी का उत्पादन और विक्रय आरम्भ हुआ।

12. उत्तर भारत बोतल बंद पानी का सबसे बड़ा बाज़ार है ( 60% से ज्यादा ), फिर दक्ष्णि क्षेत्र, जिस में बाजार का लगभग 20 प्रतिशत और पूर्वी क्षेत्र में सिर्फ 10 का योगदान है। हालांकि आधे से ज्यादा बॉटलिंग प्लांट्स भारत के  दक्षिणी क्षेत्र में केंद्रित हैं . भारत में बोतलबंद पानी संयंत्रों में  से 55 प्रतिशत से अधिक चार दक्षिणी राज्यों  में हैं।


13. 
पानी  कहाँ  से लिया जाता है& जल उपचार संयंत्रों के लिये पानी का मुख्य स्रोत भूजल है क्योंकि यह आसान है, और लगभग  मुफ्त है। कंपनियाँ केवल जमीन में एक ड्रिल करते हैं और अपने व्यवसाय के लिए पानी प्राप्त करते हैं

14.  औसतन पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बेचने वाला एक सिंगल बॉटलर हर घंटे 5,000 से 20,000 लीटर भूजल निकालता है। जादातर मामलो में उद्योग व्यवहारिक रूप से मुफ्त में पैसा कमा रहा है। क्यों कि बाटलिंग कम्पनियां सरकार को पानी निकालने के लिए एक छोटा उपकर ही भुगतान करती हैं। उदाहरण के लिए जयपुर के पास काला डेरा में कोका कोला कम्पनी ने 2000 से 2002 यानी की तीन साल में सिर्फ पांच हजार रूपये से कुछ ही अधिक भुगतान किया ।  

15.  बॉटलर्स  निकाले गए भूजल के 65 प्रतिशत से अधिक का उपयोग करने का दावा करते हैं। इससे भूजल की बर्बादी कम से कम 35 प्रतिशत तो  होती ही  है।

16.  कीमत कौन चुकाता है - बोतलबंद पानी के लिए पानी निकालने से उस क्षेत्र में  भूजल की कमी हो जाती है। जहां से पानी निकाला जा रहा है। उदाहरण के लिएए कोका-कोला द्वारा बोतलबंद पानी और अन्य पेय के लिए पानी निकालने से भारत में 50 से अधिक भारतीय गांवों में पानी की कमी हो गई । 


बोबोतल बंद पानी की बड़े पैमाने पर खपत का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पानी को पैकेज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बोतलों को बायो-डीग्रेड होने में 500 से 1,000 साल से अधिक का समय लगता है.

o अगर इन्हें जलाया जाता है, तो वे जहरीले धुएं का उत्पादन करती हैं।

o   दुनिया भर में बोतलबंद पानी की खपत में  1980 के दशक में प्लास्टिक या पैट की बोतलों का उत्पाद बाजार में आने के बाद बहुत तेजी आयी  जबकी सिर्फ प्लास्टिक की बोतलों के  उत्पादन हर साल 50 मिलियन बैरल  पेट्रोलियम तेल का उपयोग करता है जिसमें अंतिम उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए आवश्यक जीवाश्म ईंधन और ग्रीनहाउस गैसों की उत्सर्जन लागत शामिल नहीं है।

o   अनुमान है कि एक लीटर बोतलबंद पानी को पैक करने में करीब तीन लीटर पानी खर्च होता है। यह भूजल स्तर को कम करने और डाउनस्ट्रीम जल आपूर्ति को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

o   पानी की बॉटलिंग प्रक्रिया सालाना 2.5 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में छोड़ती है।

o   डिस्पोजेबल पानी की बोतल का कचरा समुद्र में बहता है और हर साल 1.1 मिलियन समुद्री जीवों को मारता है

17.  अभी भी ऐसे लोग हैं- जिन्हें पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। भारत में , बोतलबंद पानी उद्योग का राजस्व 40300 करोड़ रु से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है।जबकि यूनिसेफ इंडिया की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में 15 शहरों में 50 मिलियन लोगों के पास सुरक्षित  , किफायती पेयजल तक पहुंच नहीं है ,

o              2018 की वाटरएड रिपोर्ट के अनुसारए भारत की 1.3 बिलियन आबादी में से लगभग 163 मिलियन लोगों, यानि  10 में से एक से अधिक को अपने घर के पास साफ पानी की सुविधा नहीं है। दूर से पानी लाने के बाबजूद 91 मिलियन लोगों (जनसंख्या का 6प्रतिशत) को सुरक्षित पानी की सुविधा नहीं है।

o   रमेश चंदप्पा, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ,में राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही कि देश में कुल जनजातीय आबादी के 26.66 प्रतिशत के पास पीने के पानी के सुरक्षित स्रोत तक पहुंच नहीं है । 

o   नीतिआयोग  ने 2018 में बताया कि  2030 तक 40 प्रतिशत  भारतीयों के पास पीनेका पानी नहीं होगा 

o   यदि इस धन को  सार्वजानिक पेयजल प्रणाली पर खर्च कर  दिया जाए तो  साफ पानी तक पहुंच के बिना लोगों की संख्या को काफी कम कर सकते हैं।

18.  हमारा मानना -- स्वास्थ्य के लिए सुरक्षीत बोतल बंद पानी एक मिथक हो सकता है क्यों कि बोतल बंद पानी जो सामान्य नल के पानी से जादा सुरक्षित होने का दावा करता है वो स्वयं में संदिग्ध है। सेण्टर फॉर एनवायमेन्ट और दुनिया के कई देशों में हुई स्टेडीज ये बतलाती है।


भा भारत में बोतल बंद पानी के बढ़ते बाजार से भारत में जल एवं जल-वितरण पर कॉरपोरेट नियंत्रण तेजी से बढ़ रहा है।इसे  रोकना ही होगा | प्लाचीमाड़ा (केरल ), कालाडेरा (जयपुर- राजस्थान) और मेह्न्दीगंज (बनारस- उतरप्रदेश ) में चले आंदोलनों के कारण, इन जगहों  के बॉटलिंग प्लांट्स को बंद होना पड़ा.

 

(संदर्भ-- maximize market research, statista, mint, business wire, money control, research and market.com)

 पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक (116- 27 मार्च  2023) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्र शंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



गुरुवार, 16 मार्च 2023

बोतलबंद पानी मुक्त दिवस

 

विश्व जल दिवस-22 मार्च

“बोतलबंद पानी मुक्त दिवस” के रूप में मनाइए

19 फरवरी 2023 को मेक्सिको के मूल निवासिओं और पैकेज्ड पयेजल कम्पनियों दुआरा की जा रही पानी की लूट के खिलाफ काम करने वाले समूहों ने, पूरी दुनिया के पानी पहेरेदारों से, 22 मार्च  2023 के विश्व जल दिवस पर पैकेज्ड पयेजल कम्पनियों दुआरा पानी की लूट के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया. क्योंकि समस्या अपनी प्रकृति में वैश्विक है.   

इसी आवाहन का समर्थन करते हुये, जलधारा अभियान, जयपुर, 22 मार्च 2023 को “ विश्व जल दिवस " को  "बोतल बंद पानी मुक्त दिवस “ के रूप में मनाने  का अनुरोध आप सभी से करता है |



आप यह सब कर साथ दे सकते हैं ---

अपना पानी, अपनी बोतल में साथ ले कर चलें और  स्टेन लेस स्टील, ताम्बे, पीतल या अन्य बार बार भरी जाने वाली बोतल का प्रयोग करें,

अपने शहर के अधिकारियों से स्थानीय पार्कों, बस स्टैंड, स्कूल कॉलेज, अस्पताल में पानी भरने के नल स्थापित करने की मांग करें.

होटल ,कैंटीन,रेस्तौरेंट, ट्रेन जैसे प्रितिष्ठानो के अधिकारीयों को पत्र लिख अथवा मिलकर, बोतल बंद पानी न परोसने का अनुरोध करें.

स्वच्छ, किफायती, गुणवत्ता वाली सार्वजनिक नल जल प्रणाली को बढ़ावा देने वाली नीतियों की मांग और समर्थन करें

बहुत जरुरी होने पर ही बोतल बंद पानी खरीदें

 पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक

 (115-16 मार्च 2023) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्र शंकर-7597088300, मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



बुधवार, 1 मार्च 2023

मैक्सिकन समूहों का पानी की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ वैश्विक विरोध का आह्वान

 

125 अभियानों , संगठनों और  मूलनिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले, मेक्सिको के 18 राज्यों के 500 से अधिक लोग, 18-19 फरवरी  2023 को सेंटियागो के, डे मेक्सक्विटिट्लान, क्वेरेटारो ( मध्य मक्सिको में एक राज्य ) जमा हुये और  “ एसेंबली फॉर वाटर एंड फॉर लाइफ ” का आयोजन किया |





 ( मक्सिको के मूलनिवासी  अपने अस्तित्व के वचाव के लिये और जलवायु को खतरे में डालने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरोध में खड़े हैं )

 एसेंबली फॉर वाटर एंड फॉर लाइफ, ऐसे समूहों को एक साथ लाने का काम करता है, जो स्थानीय और मूलनिवासियों के पानी को , अपने उत्पादों या ब्रांड्स के लिए हड़पने वाली, अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कंपनियों, का विरोध कर रहे हैं।  यह कंपनियाँ अक्सर  उस पानी का व्यपार करती हैं जो स्थानीय उपयोग के लिए होता है,  या आमतौर पर मूलनिवासियों की भूमि से होता है।

मेक्सिको वर्तमान में एक गंभीर शुष्क मौसम और भयावह सूखे का सामना कर रहा है,  इसीलिये कार्यकर्ताओं ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए " यह सूखा नहीं है, यह लूट है " का नारा बुलंद किया | उनका मानना है कि निगम, सरकारी समर्थन के साथ, जल संकट पैदा कर रहे हैं।

सभा में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पानी और प्रकृति, तस्करी और शोषण की वस्तुएं बन गई हैं, और जो इसका विरोध करते हैं उन्हें अपराधी करार दिया जाता है, धमकाया जाता है, कैद किया जाता है और यहां तक कि मार दिया जाता है।

पिछले साल, वर्तमान असेंबली के राज्य ,क्वेरेटारो में  पेयजल सेवाओं के प्रबंधन का निजीकरण किया गया । जबकि  राज्य का पूरा क्षेत्र सूखे से प्रभावित था , और राज्य का एक तिहाई से अधिक क्षेत्र गंभीर सूखे से पीड़ित था । इसके अलावा, क्वेरेटारो के 26 मुख्य बांध तेजी से खाली हो रहे थे । ऐसा माना जाता है कि, कई कारणों में से एक कारण, राज्य के पास विशिष्ट स्थानीय जल कानून नहीं होना, भी है |

 सैंटियागो डे मेक्सक्विटिट्लान में, ओटोमी के लोगों को, डेवलपर्स और अन्य कंपनियों को अपने पानी की चोरी रोकने के लिए, कुओं के चारों तरफ 24 घंटे की निगरानी करनी पड़ रही है | पानी ले जाते ट्रको को पकड़ने के लिये, सड़कों और रास्तों पर गश्त करनी पड़ती है |

सभा ने स्वीकार किया कि समस्या अपनी प्रकृति में वैश्विक है , और इसीलिये 22 मार्च, 2023 के  विश्व जल दिवस  पर पानी की लूट के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया। मंच से यह कहा गया कि , इस दिन,  पूरी दुनिया मे , इसका विरोध करते हुए यह बताया जाए कि कैसे नेस्ले,  डैनोन,  कोका कोला ,पेप्सी और मेगा डेवलपर्स जैसी कंपनियां शीतल पेय और बोतलबंद पानी जैसी वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए लोगो के पानी को हड़प रही हैं, जबकि छोटे खेती और उपयोग की अन्य भूमि जैसे चारागाह सूख जाती है।

पिछले साल फरवरी से ही, मेक्सिको के बीस स्वदेशी समुदाय, अन्य संगठनों के साथ, फ्रांस की डेनोन और अन्य पानी की बॉटलिंग कंपनियों के बहिष्कार के आह्वान के लिये इस तेरह के सम्मलेन आयोजित कर रहे हैं| इसी साल ,अगस्त  के मध्य में एक और राष्ट्रीय असेंबली की योजना है।

 

(संदर्भ—ग्रीनलेफ्ट वीकली,रेड्डित.कॉम ) 

         पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक-(114-27 फरवरी 2023) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्र शंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com

 


शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

बैटरी से चलने वाले वाहन, सूखा सकते हैं पानी के स्रोत

  पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक

 बैटरी से चलने वाले वाहन, सूखा सकते हैं पानी के स्रोत

सितम्बर 2022 में चंडीगढ़ प्रसाशन ने एक अधिसूचना जारी की, जिसके मुताबिक,चंडीगढ़ शहर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए, दो साल में पेट्रोल मोटरसाइकिल  का पंजीकरण बंद हो जायेगा । सिर्फ ई-बाइकों का ही पंजीकरण होगा। पांच वर्षों में पेट्रोल-डीजल की कारों को भी आधा करने की तैयारी है। नया ई-वाहन खरीदने पर लोगों को तीन हजार से लेकर दो लाख तक का इंसेंटिव भी मिलेगा।

 इस तरह पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिये, अभी के समय में सबसे ज्यादा लिथियम से बनी बेट्रियो का प्रयोग हो रहा है | लेकिन इस बदलाव के लिये  दुनिया को कुछ  बड़े पर्यावरणीय मूल्य का भुगतान करने को भी तैयार होना चाहिए | यह सवाल तत्काल दक्षिण अमेरिकी के कुछ देशो की परिस्थिति को देख-जान कर उठ रहा है | जहां इस बात की आशंका बढ़ रही है कि वैश्विक जलवायु के लिए जो अच्छा है, वह दुनिया के कुछ दुर्लभ और सबसे कीमती पारिस्थितिक तंत्रों के लिए एक आपदा हो सकता है, जैसे कि दक्षिण अमेरिका में शुष्क उच्च एंडीज पर्वतों की, नदियों , आर्द्रभूमि, चरागाह, और झीलें के सम्बन्ध मे |

लिथियम उपलब्ध सभी धातुओं में सबसे हल्का है। ऊर्जा को स्टोर करने की उच्च क्षमता के साथ नरम भी है | यह हल्के, रिचार्जेबल बैटरी बनाने के लिए आदर्श सामग्री है। मोबाइल उपकरणों को शक्ति देने के लिए लिथियम-आयन बैटरी के लिए धातु की मांग तीन दशकों से मजबूती से बढ़ी है। जबकि मोबाइल-फोन की बैटरी को लिथियम कार्बोनेट के एक औंस के दसवें हिस्से की आवश्यकता होती है,  जबकि एक सामान्य इलेक्ट्रिक-कार बैटरी के लिए 130 पाउंड - लगभग 20,000 गुना अधिक की आवश्यकता होती है। इसीलिए लिथियम की मांग 2030 तक चौगुनी होकर 2.4 मिलियन मीट्रिक टन सालाना होने की भविष्यवाणी की गई है, और प्रत्याशा में, विश्व बाजारों में कीमतें पिछले वर्ष में दस गुना के करीब बढ़ी हैं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के आधे से अधिक लिथियम भंडार, अर्जेंटीना, बोलिविया और चिली के बीच की सीमाओं पर फैले दूरस्थ क्षेत्र के भीतर पुराने भूमिगत जल में घुले हुए हैं | यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) का अनुमान है कि वैश्विक कुल 86 मिलियन टन पहचाने गए लिथियम में से बोलीविया में 21 मिलियन टन, अर्जेंटीना में 19.3 मिलियन और चिली में 9.6 मिलियन टन है। आजकल इस क्षेत्र को लिथियम त्रिभुज के रूप में जाना जाता है |

दक्षिण अमेरिका में चिली, बोलीविया और अर्जेंटीना देशो की सरहदों को समेटता हुआ, लिथियम त्रिभुज

लिथियम के निष्कर्षण के लिए बहुत अधिक मात्रा में पानी का उपयोग करने की आवश्यकता होती है, लगभग 2.2 मिलियन ( 22 लाख ) लीटर प्रति टन (1000 kg) लिथियम । इसने लिथियम  निकाले  जाने वाले छेत्रो में जल संकट के गंभीर मुद्दों को जन्म दिया है |

वर्तमान में, लिथियम पाने के लिए यह दुनिया में सबसे तेज और सस्ता तरीका माना जाता है, जमीन के भीतरी पानी को सतह पर पंप करके और उसमें मौजूद लिथियम कार्बोनेट को केंद्रित करने के लिए धूप में वाष्पित करना |

 पोटोसी, बोलीविया में एक खदान में लिथियम युक्त नमकीन को वाष्पीकरण पूल में पंप किया जाता   हुआ । (फोटो -कार्लोस बेसेरा / ब्लूमबर्ग)


खनन कंपनियां,
कुओं से नमकीन भूमिगत पानी को पंप करके, वाष्पीकरण के लिये  समतल भूमि (उथले तालाबो) में छोड़ देतीं हैं | इस तरह से वे नमकीन समतल भूमि (उथले तालाबों) को  दसियों वर्ग किलोमीटर में फैला रहे हैं | आमतौर पर, धूप में एक या एक साल बाद , जब काफी पानी के उड़ जाने के बाद, लिथियम कार्बोनेट की सांद्रता 3.5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो लिथियम निकालने के लिये आगे के रासायनिक उपचार के लिए इस नमकीन भुर भुरे पदार्थ को ट्रक द्वारा दूसरी जगह भेजा जाता है। लेकिन ,रसायनज्ञ विक्टोरिया फ्लेक्सर की गणना के अनुसार, इस समय तक, एकत्र किए गए प्रत्येक टन लिथियम कार्बोनेट के लिए लगभग आधा मिलियन गैलन (पांच लाख गैलन यानि 22,50,000 लीटर) पानी वाष्पित हो चुका होता है| बोलीविया की सैन क्रिस्टोबल खदान कथित तौर पर एक दिन में 50,000 लीटर पानी का उपयोग करती है।

 भूमिगत पानी का इस तरह से निष्कर्षण जमीन के अन्दर पानी की सतह यानि भूं जलस्तर को कम करता है, और क्योंकि मीठे पानी के स्रोत्र अक्सर खारे पानी के ऊपर बैठते है, इसलिये यह तरीका झीलों, आर्द्रभूमि, झरनों और नदियों को सुखाने की क्षमता रखता है | एक रिपोर्ट के अनुसार, चिली में, लिथियम खनन कंपनियों पर, सालार डी अटाकामा क्षेत्र, में महत्वपूर्ण जल आपूर्ति को 65% तक कम करने का आरोप है।

हाइड्रोलॉजिस्ट और संरक्षणवादियों का कहना है कि अर्जेंटीना में लिथियम खनन, अपने क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र को रेगिस्तान में बदलने के लिए तैयार है।  उच्च एंडीज के स्वदेशी लोगों का आरौप है कि उनके आस पास का पानी जिस पर वे घरेलू उपयोग के लिए भरोसा करते हैं, चरागाहों को जीवित रखने के लिए जिन पर उनका पशुधन निर्भर करता है, जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए, लिथियम बेटरी चालित   हरित वाहनों के वैश्विक अभियान में बलिदान किया जा रहा है।

ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) विश्वविद्यालय के हाइड्रोजियोलॉजिस्ट मार्सेलो स्टिकको के अनुसार, बेसिन आमतौर पर जमीन के नीचे हाइड्रोलॉजिकल रूप से जुड़े होते हैं, इसलिए एक स्थान पर भूमिगत पानी के स्तर को कम करने से यह दूसरों स्थान भी कम हो सकता है। एक संरक्षण संगठन, वेटलैंड्स इंटरनेशनल,जो कि हाई एंडियन वेटलैंड्स को बचाने के लिए प्रयासरत है, के कार्यक्रम प्रबंधक , रोमन बेगुन कहते हैं " भूमिगत पानी की निकासी, परियोजनाओं के सतह क्षेत्र से कई गुना बड़े क्षेत्र में आर्द्रभूमि और समुदायों को प्रभावित कर सकती है"। उनका कहना है कि " जो अरबों लीटर पानी वाष्पित हो जाता है, सिस्टम में कभी वापस नहीं आता है।"

घाटी के स्थानीय लोगों का कहना है कि होम्ब्रे मुएर्तो साल्ट फ्लैट पर, 25 साल पुराने फेनिक्स ऑपरेशन के लिए की गयी पंपिंग ने पानी के स्तर को इतना कम कर दिया है कि उनके घास के मैदानों के लिए पानी का एक प्रमुख स्रोत ट्रैपिची नदी सूख गई है, जिससे उनके पशुओं को चरने की जगह नहीं मिल रही है। वहां के समुदाय अब पानी के अन्य मुख्य स्रोत पाटोस नदी के साथ भी ऐसा ही होने से रोकने के लिए लामबंद हो गए हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि नए पम्पिंग कुओं से पटोस नदी को भी खतरा है।

अर्जेंटीना के स्वदेशी कार्यकर्ता रोमन गुइतिआन ने टाइम मैगज़ीन से अपनी बातचीत में कहा कि "भविष्य में, हमारे पास लिथियम होगा, हमारे पास इलेक्ट्रिक कारें होंगी, लेकिन हमारे पास पानी नहीं होगा।"

 यंहा पर बहुत  मेहेत्व्पुरण यह है कि तीनों देशो की सरकारों और अधिकारिओ ने खनन के समर्थन के लिए एक तरह से अपनी आँखे बंद कर रखी हैं । अर्जेंटीना के गोंजालेज और स्नाइडर बताते हैं, कि अधिकारी खनन प्रकारिया और छेत्र का सिर्फ "थोड़ा निरीक्षण" करते हैं, जबकि “पर्यावरणीय आकलन” और “सामुदायिक संपर्क” दोनों को करने (व्यवस्थित) के लिये (स्वयं) कंपनियों को स्वतंत्रता देते हैं।

 पर्यावरणीय विश्लेषक, मारकोनी का कहना है कि इसका परिणाम अच्छे कॉर्पोरेट अभ्यास के रूप में नहीं हुआ|  जब उसने लिथियम निष्कर्षण के लिए 11 कम्पनियों का पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का विश्लेषण किया, तो उसने पाया कि स्थानीय जल आपूर्ति और आर्द्रभूमि पर वाष्पीकरण, तालाबो पर प्रभाव ,का पूर्ण हाइड्रोलॉजिकल विश्लेषण या कठोर मूल्यांकन शामिल नहीं है।

 इसी तरह, आलोचकों के अनुसार कंपनियाँ स्थानीय परामर्श पर भी कंजूसी करती हैं। जबकी सिद्धांत रूप में, उन्हें खनन के लिए स्थानीय समुदायों की "स्वतंत्र और पूर्व लिखित सहमति " प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।  अर्जेंटीना के एनजीओ एनवायरनमेंटल एंड नेचुरल रिसोर्सेज फाउंडेशन (एफएआरएन) में पर्यावरण नीति के निदेशक, पिया मार्चेगियानी, ने पाया कि व्यवहार में, स्थानीय समुदायों को या तो नज़रअंदाज कर दिया गया या धोका देने के लिये ऐसी तकनीकी भाषा, रिपोर्ट में प्रयोग की गयी, जिसे वे समझ नहीं सकते थे | मार्चेजियानी ने निष्कर्ष निकाला, "परियोजनाएं थोड़ी आलोचनात्मक समीक्षा के साथ अनुमोदन प्राप्त कर रही हैं।“

(सन्दर्भ–यूरोन्यूज़.कॉम,येल एनवायरनमेंट 360,माइनिंग टेक्नोलॉजी,द इकोनॉमिस्ट )

 पानी पत्रक (113-18 फरवरी 2023 ) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्र शंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



 

पेरिस समझौते के बाद पर्यावरण पर भारत की संसद में चर्चा

( तस्वीर , 1अक्टूबर 2026 को, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया,नई दिल्ली में "क्लाइमेट ऑन द फ्लोर: इंडियाज़ पार्लियामेंट्री डिस्कोर्स ऑन एनवायरनमेंट...