मंगलवार, 11 अगस्त 2026

असम-मेघालय सीमा पर प्रस्तावित कुलसी बांध परियोजना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, बांध रद्द करने की मांग

                    (इमेज साभार –इंडिया टुडे-नार्थ ईस्ट )

असम के बोको-छायगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती गांव उकियाम में प्रस्तावित कुलसी नदी बांध परियोजना के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ.

असम ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंदोलन असम-मेघालय संयुक्त संरक्षण समिति के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार की योजना के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की.

उकियाम में तीन नदियों के संगम से बनने वाली कुलसी नदी पर असम और मेघालय सरकारें जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजना विकसित करने की योजना बना रही हैं. इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत काम करने वाले ब्रह्मपुत्र बोर्ड को सौंपी गई थी.

हालांकि, मेघालय के खासी समुदाय और असम के गारो, बोडो और राभा समुदाय लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करते रहे हैं. उनका कहना है कि इससे क्षेत्र पर गंभीर और विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे.

शनिवार,1 अगस्त 2026 को सैकड़ों लोग कुलसी नदी के तट पर एकत्र हुए और अपनी चिंताएं व्यक्त कीं. समिति के अध्यक्ष बिस्वजीत राभा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने पहले आश्वासन दिया था कि अगर स्थानीय लोग विरोध करेंगे तो कुलसी नदी पर बांध नहीं बनाया जाएगा. लेकिन 30 जुलाई को कथित तौर पर इस परियोजना की डीपीआर असम पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंप दी गई, जिससे स्थानीय लोगों की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं. ये दस्तावेज़ ब्रह्मपुत्र बोर्ड के जनरल मैनेजर अभय कुमार और APGCL के चीफ जनरल मैनेजर सौरव सैकिया के बीच सौंपे गए।

बिस्वजीत राभा ने आरोप लगाया कि दोनों राज्य सरकारें इस बांध के जरिए जल बमबनाकर लोगों की जान जोखिम में डालने की साजिश कर रही हैं.

प्रदर्शन में राभा और गारो छात्र संगठनों सहित कई स्थानीय संगठनों ने भी भाग लिया और परियोजना का विरोध किया. अखबार के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय महिला ने कहा, ‘हमने विकास की उम्मीद में वोट दिया था, लेकिन अब सरकार हमें इस बांध के जरिए डुबोने की योजना बना रही है.

कामरूप जिला राभा छात्र संघ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रस्तावित बांध स्थल भारत के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में स्थित है. संगठन ने चेतावनी दी कि यहां बांध निर्माण से गंभीर और विनाशकारी खतरे पैदा हो सकते हैं.

संघ के अध्यक्ष आनंद राभा ने बताया कि पिछले वर्ष असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर परियोजना पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया था. हालांकि सरकारों ने स्थानीय लोगों से परामर्श का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई सार्थक संवाद नहीं हुआ है.

संयुक्त संरक्षण समिति के महासचिव अशोक नोंगबक ने हाल ही में ऊपरी असम में आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना बताती है कि इस क्षेत्र के लोग जल संबंधी आपदाओं के प्रति कितने संवेदनशील हैं. डीपीआर सौंपे जाने की खबर से सीमावर्ती गांवों के लोग गहरी चिंता में हैं.

इससे पहले 30 जुलाई 2026 को  कई नागरिक संगठनों के समर्थन वाले 'कुलसी नदीबांध विरोधी संग्राम मंच' ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर आरोप लगाया कि कुलसी नदी के किनारे रहने वाले समुदायों के लगातार विरोध के बावजूद वह ₹1,454.95 करोड़ के 55 मेगावाट के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है।

प्रोजेक्ट की जानकारी के अनुसार, इसमें 60 फुट ऊँचे बांध का निर्माण शामिल है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इससे लगभग 26,000 हेक्टेयर ज़मीन प्रभावित होगी और उकियाम से छायागाँव होते हुए चमारिया तक फैली बस्तियों पर असर पड़ेगा।

स्थानीय निवासियों और पर्यावरण समूहों को डर है कि इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है, खेती की ज़मीन और जंगल डूब सकते हैं, और कुलसी नदी का इकोसिस्टम बदल सकता है, जो अंतर-राज्यीय सीमा के दोनों ओर हज़ारों लोगों की आजीविका का आधार है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकारों से कुलसी बांध परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकारें परियोजना को आगे बढ़ाती हैं तो आंदोलन और तेज होगा.

(सन्दर्भ /साभार –Hub News,The Wire, risearchive.in )

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