मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

ओडिशा के सिजीमाली में लगातार गिरफ्तारियां और सरकारी दमन

ओडिशा के सिजीमाली इलाके में आदिवासी और दलित समुदाय खनन कार्यों का विरोध कर रहे हैं। इसके जवाब में, सरकार ने बातचीत करने के बजाय ग्रामीणों पर अपना दमन और तेज कर दिया है। इसका मकसद रायगडा जिले के काशीपुर ब्लॉक में वेदांता लिमिटेड की बॉक्साइट परियोजना के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन को कुचलना है। 16 अक्टूबर को खनन-विरोधी संघर्ष के कार्यकर्ताओं, डॉ. रैंडल सिकेरा और लक्ष्मण नाइक को मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किया गया। यह उस निरंतर हिंसा और मनमानी गिरफ्तारियों का हिस्सा है, जो 2023 के मध्य से राज्य सरकार और खनन कंपनियों की मिलीभगत द्वारा की जा रही हैं।

ओडिशा की 'कंसर्न्ड सिटीजन्स कमिटी' (Concerned Citizens Committee) ने एक बयान जारी कर सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों, आंदोलनों और व्यक्तियों से एकजुटता दिखाने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि 'जल, जंगल और ज़मीन' के लिए संघर्ष कर रहे ओडिशा के लोगों पर थोपे गए सभी आपराधिक मामलों को वापस लिया जाए।

ओडिशा की 'कंसर्न्ड सिटीजन्स कमिटी' (Concerned Citizens Committee) का  पूरा बयान यहाँ दिया जा रहा है :-

दिनांक: 18 अक्टूबर 2026, रात 12 बजे

दक्षिण ओडिशा में आदिवासी और दलित समुदाय अपनी ज़मीन, जंगल और जल संसाधनों (जिनमें पहाड़ और जलधाराएँ शामिल हैं) तथा अपनी पहचान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन जन-आंदोलनों का समर्थन करने वाले खनन-विरोधी कार्यकर्ताओं के खिलाफ राज्य द्वारा दमन की कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में, 16 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 10:45 बजे, कालाहांडी के भवानीपटना से डॉ. रैंडल सिकेरा और लक्ष्मण नाइक को गिरफ्तार कर लिया गया।

लक्ष्मण नाइक 'मा माटी माली सुरक्षा मंच' और 'समाजवादी जन परिषद' के एक प्रमुख दलित कार्यकर्ता हैं। पेशे से, वे रायगडा ज़िले में मार्शल आर्ट्स के एक कुशल प्रशिक्षक हैं। डॉ. रैंडल सिकेरा कालाहांडी और रायगडा ज़िलों में आदिवासी समुदायों के साथ काम कर रहे हैं। MBBS करने के बाद, उन्होंने जनरल मेडिसिन में MD की डिग्री हासिल की। ​​वे 'मेडिको फ्रेंड्स सर्कल' और 'जन स्वास्थ्य अभियान' के सदस्य भी हैं। ये दोनों ही खनन और औद्योगीकरण के कारण होने वाले विस्थापन और संकट के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलनों का समर्थन करने और लोगों के आवासों की रक्षा करने के लिए समर्पित हैं।

(ओडिशा पुलिस ने अप्रैल में कांतामल में हुई घटनाओं के सिलसिले में कार्यकर्ताओं लक्ष्मण नाइक और डॉ. रैंडल सिकेरा को गिरफ्तार किया। नागरिक समाज समूहों ने इसे एक मनगढ़ंत मामला बताया है और कहा है कि यह सिजीमाली में वेदांता की बॉक्साइट माइनिंग का विरोध करने वालों के दमन की एक कड़ी है-इमेज साभार -Maktoob)

इन दोनों को भवानीपटना के हिल टाउन स्थित डॉ. रैंडल के आवास से अवैध रूप से उठा लिया गया। पुलिस की दो जीपें वहाँ पहुँचीं; कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे, तो कुछ वर्दी में। टाउन पुलिस स्टेशन के IIC प्रद्युम्न कुमार महापात्रा के नेतृत्व में लगभग 6 लोग बिना कोई कारण बताए, और बिना कोई वारंट या नोटिस दिए, डॉ. रैंडल के घर में घुस आए। उन्होंने उनके फोन ज़ब्त कर लिए और उन्हें ज़बरदस्ती भवानीपटना के टाउन पुलिस स्टेशन ले गए।

पूरी रात उन्हें टाउन पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया, जहाँ उन्हें अपने वकीलों या परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की कोई अनुमति नहीं दी गई। हालाँकि, 17 अक्टूबर की सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक, जब उन्हें रायगडा में सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) के सामने पेश किया गया, तब तक उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वकीलों, परिवार के सदस्यों और कार्यकर्ताओं द्वारा उनके ठिकाने और गिरफ्तारी के आधार के बारे में बार-बार पूछने और अनुरोध करने के बावजूद, कालाहांडी और रायगडा पुलिस ने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।

17 अक्टूबर की दोपहर को डॉ. रैंडल के घर पर भेजे गए एक सूचना नोटिस में गलत तरीके से कहा गया है कि उन्हें सुबह 10 बजे गिरफ्तार किया गया था। इसमें रात भर उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने और बाद में काशीपुर, रायगडा ले जाने का कोई जिक्र नहीं है। लक्ष्मण नाइक के मामले में, उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया गया था। जब तक उन्हें रायगडा में SDJM के सामने पेश नहीं किया गया, तब तक उनके ठिकाने और हिरासत में लिए जाने के कारणों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

डॉ. रैंडल और लक्ष्मण, दोनों को काशीपुर पुलिस स्टेशन के केस नंबर 85/2026 के सिलसिले में रायगडा के SDJM के सामने पेश किया गया। यह मामला 6-7 अप्रैल की रात को रायगडा के कांतामल गाँव में हुई घटनाओं से जुड़ा है, जहाँ पुलिस का एक बड़ा दस्ता गाँव में घुस गया था। वहाँ पुलिस ने अंधाधुंध लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

FIR में न तो लक्ष्मण नाइक का नाम है और न ही डॉ.रैंडल का। काशीपुर पुलिस ने इन दोनों व्यक्तियों पर कई गंभीर धाराएं लगाई हैं, जिनमें धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), धारा 191(2) और 191(3) (घातक हथियारों के साथ दंगा करना), धारा 310(2) (डकैती या हथियारों के साथ लूट), धारा 351(3) (जान से मारने या गंभीर चोट पहुँचाने की धमकी देकर डराना) और अन्य धाराएं (BNS की धारा 126(1), 127(2), 132, 121(2), 296, 190) शामिल हैं। इसके अलावा, राज्य प्रशासन ने 'आर्म्स एक्ट' (शस्त्र अधिनियम) की धारा 27 भी लगाई है, जो अवैध गतिविधियों के लिए हथियारों और गोला-बारूद रखने या इस्तेमाल करने से संबंधित है।

ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं, लेकिन पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं। इनसे राज्य और पुलिस के उस गहरे और दुर्भावनापूर्ण इरादे का पता चलता है—जिसे वेदांता और अडानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों का समर्थन प्राप्त है—कि वे इन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी-दलित समुदायों की प्राकृतिक संपदा की लूट के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को दबाना चाहते हैं और जन-आंदोलनों के हौसले को तोड़ना चाहते हैं।

इस FIR की पृष्ठभूमि 6-7 अप्रैल की रात को ओडिशा पुलिस द्वारा किए गए क्रूर दमन से जुड़ी है। उस समय रायगड़ा पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ कई FIR दर्ज की थीं, क्योंकि ग्रामीणों ने निषेधाज्ञा (prohibitory orders) का सामूहिक रूप से विरोध किया था और कांतामल में पुलिस के दमन का सामना किया था। यह बेहद चौंकाने वाली और अन्यायपूर्ण बात है कि कांतामल के ग्रामीणों द्वारा मई 2026 से शिकायतें भेजे जाने के बावजूद, न तो पुलिस के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है और न ही इन घटनाओं की कोई जांच की गई है।

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि डॉ. रैंडल ने 7 अप्रैल के केस नंबर 87/2026 में पहले ही अग्रिम जमानत (anticipatory bail) ले ली है, जिसमें उनका नाम शामिल है। उसी घटना से जुड़ी एक अन्य FIR (केस 85/2026) के आधार पर लक्ष्मण नाइक और डॉ. रैंडल की गिरफ्तारी—जबकि इस FIR में उनमें से किसी का भी नाम नहीं है—यह दर्शाती है कि कालाहांडी-रायगडा जिलों में खनन का विरोध करने वाले और लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों की मनमानी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। इसके अलावा, 7 अप्रैल की एक ही घटना से जुड़ी तीन FIR (केस नंबर 85, 86, 87) दर्ज करना अपने आप में कानूनी रूप से सवालों के घेरे में है।

जब उन्हें SDJM के सामने पेश किया गया, तो उनसे उनकी हिरासत की अवधि के बारे में कुछ नहीं पूछा गया। सामान्य प्रक्रिया के तहत, यह पता लगाने के लिए पूछताछ की जाती है कि क्या हिरासत के दौरान उनके साथ कोई हिंसा या दुर्व्यवहार हुआ है। इसके बजाय, डॉ. रैंडल ने खुद बताया कि अवैध हिरासत और गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ कैसा बुरा बर्ताव किया गया। उन्होंने बताया कि कैसे बिना किसी 'सीज़र मेमो' (seizure memo) के या तय प्रोटोकॉल का पालन किए बिना उनके फोन जबरन छीन लिए गए। साथ ही, उन्हें सुबह 6 बजे भवानीपटना से ले जाया गया, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन पर क्या आरोप हैं या उन्हें कहाँ ले जाया जा रहा है। अंततः, शाम 6:30 बजे उन्हें रायगडा के SDJM के सामने पेश किया गया। SDJM ने डॉ. रैंडल का बयान दर्ज नहीं किया। हमें आशंका है कि इन दोनों कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन के साथ छेड़छाड़ करके उनके खिलाफ फर्जी डिजिटल सबूत तैयार किए जा सकते हैं।

इसके अलावा, लक्ष्मण नाइक को अपना बयान दर्ज करने का मौका नहीं दिया गया; न ही उनके परिवार को BNSS की धारा 48 के तहत उनकी गिरफ्तारी के नोटिस की कोई प्रति दी गई। बाद में, उन दोनों को रायगडा सब-जेल में रिमांड पर भेज दिया गया।

हम सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों, आंदोलनों और व्यक्तियों से अपील करते हैं कि वे एकजुटता दिखाएं और ओडिशा में 'जल, जंगल और ज़मीन' के लिए संघर्ष कर रहे लोगों पर थोपे गए सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग करें!!

'कंसर्न्ड सिटीजन्स कमिटी', भुवनेश्वर की ओर से

(सन्दर्भ /साभार –Groundxero )

 जल से संबंधित सूचनाओ, समाचारों और सन्दर्भों का संकलन–पानी -पत्रक

 पानी पत्रक- 341( 20 अक्टूबर 2026 ) जलधारा अभियान-जयपुर -संपर्क- उपेन्द्र शंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com. वेबसाइट-जलधारा अभियान –राजस्थान



  

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