शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

हरिहरपुर के लिये,काफिला बढता गया

 पुलिस को पीछे हटना पड़ा

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पाउन निगम को, आवंटित कोयला खदानों, जिनका एमडीओ अडानी समूह के पास है , मै पेडो की कटाई के खिलाफ हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के आवाहन पर नागरिक प्रतिरोध मार्च में बड़ी संख्या में  आदिवासी गावों एवं रायपुर, विलासपुर  व अन्य शहरों के लोग, सरगुजा जिले के विकासखंड उदयपुर अंतर्गत ग्राम हरिहरपुर पहुंचे । हालाकी पुलिस ने रायपुर, बिलासपुर, कोरवा समेत कई जिलों में बडी संख्या में उन लागों को रोका जो हसदेव अरण्य में स्तिथ इस गाँव  जाना चाहते थे।

पुलिस ने हसदेव के हरिहरपुर जाने वाले रास्तों पर तगडी घेरा बंदी की थी। लेकिन जब लोगों का काफिला बढ़ता गया तो पुलिस को पीछे हटना पड़ा। छत्तीसगढ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुकला ने बताया की करीब 50 संगठनो के, पांच हजार लोग प्रशासन द्वारा खडी की गई तमाम बाधाओं के बावजूद, हरिहरपुर पहुँच गये।. । कई जगह पर पुलिस से बहस के बाद बेरिकेटिंग तोड कर मार्च किया गया। छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन  के आलोक शुक्ला, छतीसगढ़ किसान सभा के संजय पराते औऱ उनके साथीभी पुलिस से बहस के बाद बेरिकेड हटा कर हरिहर पुर पहुंचे . प्रशासन ने हसदेव क्षे़त्र के गांव के वासियों को भी अपने गांव से निकलने पर प्रतिबंध लगाया । जब लोगों ने हाइवे जाम करने की धमकी दी तब इस प्रतिबंध को खत्म किया गया और गांवों के लोग सभा स्थल पर पहुंच पाये । इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी थे । करीब तीन हजार महिलाएं थी, जिनमें से काफी  के साथ बच्चे भी थे . गाँव से आने वाले  प्रदर्शनकारिओं के हाथों में तिरंगा झंडा था. काफी आदिवासी पारम्परिक हथियार भी अपने साथ लेकर आये । संयुक्त किसान मोर्चा ने लगभग दो हजार से जादा लोगों को रोकने करने का आरोप लगाया, उन्होंने  कहा कि सरकार द्वारा दुर्ग, बस्तर, रायपुर, बिलासपुर, कोरवा व सरबुजा से आने वाले करीब दो सौ से ज्यादा  वाहनों को रोका गया।

 गाँव से आने वाले बहुत से प्रदर्शनकारी अपने अपने घर से चांवल, दाल, आलू व अन्य खाने की सामग्री लेकर पहुंचे थे। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने इसके लिये आवाहन भी किया था. इस सामग्री से प्रीतिरोध मार्च में आये लोगों को भोजन बनाकर ,भोजन करवाया गया एवं बची हुई सामग्री हरिपुर में ही  675 दिन से धरने पर बैठे आंदोलनकारी साथीयों दे दी गयी ।(खबर विलासपुर का यह यू टूयब जरुर देखिये –लिंक https://www.youtube.com/watch?v=XeK0rmdcwg0)

हरिहपुर में, छत्तीस गढ़ बचाओं आंदोलन के आलोक शुक्ला, छत्तीसगढ़ किसान सभा के संजय पराते, भारतीय किसान युनियन के प्रविण श्योकर , पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर, आदिवासी सभा के सौरा यादव ने सभा को संबोधित किया. आप पार्टी, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी, मार्क्सवादी कम्न्यूस्ट पार्टी, भाकपा माले- रेड स्टार  और लिबरेशन , गोडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे एवं इनके  प्रतिनिधियों द्वार भी  सभा को संबोधित किया गया और उन्होंने आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता प्रकट की ।

जब कुछ पत्रकारो और  यूट्यूर्बस ने सभा में आये गाँव के लोगों विशेषकर आदिवासी लोगों से बात की तो उन्होने सीधे सीधे कहा कि वो जंगल बचाने आये हैं,जंगल कटना नहीं चाहिए । आदिवासी सिर्फ पेड़ों को बचाने की बात नहीं कर रहे थे वे वहां के जीव-जन्तुओं,हाथी की और नदी पानी को बचाने की बात भी जोर शोर से करते थे ।  एक आदिवासी व्यक्तिने कहा कि ये राजनितिक लड़ाई नहीं है, ये जल जंगल जमीन बचाने की लड़ाई है, ये सिर्फ आदिवासी या छत्तीसगढ़ीयों की लड़ाई नहीं है ये सब की लड़ाई है पूरे देस की लड़ाई है । इसीलिए हम तिरंगे को हाथ में लेकर आये हैं , हम तिरंगे के नीचे लड़ रहे हैं . लोग कॉंग्रेस एवं वीजेपी दोनो को जंगल कटने के लिए जिम्मेदार बताते है । लोगो का कहना है कि इस आंदोलन में पार्टी राजनिति नहीं होनी चाहिए यहां जंगल बचाना चाहिए ।. हमारे लोग 675 दिन से धरने पे हैं ,और तब तक हैं जब तक कम्पनी वापिस नहीं जाती .

हसदेव जंगल छत्तीसगढ़ का फेफड़ा है, जब फेफड़ा ही नहीं रहेगा तो फिर सांस कहां से लेगें हम।

प्रतिरोघ मार्च एवं प्रतिरोध सभा में नारे भी लगातार लगते रहे- कम्पनी दलालों को,घूंसा मारो सालो को, ग्राम सभा का फर्जी प्रस्ताव रद्द करो,रद्द करो । जल, जंगल, जमीन की रक्षा कौन करेगा ,हम करेंगे, हम करेंगे।, हसदेव की जय. ईंकलाब जिन्दा बाद का नारा भी, लगता रहा--गुंजता रहा।

बिलासपुर, दुर्ग और अम्बिकापुर में भी प्रदर्षन किए गये। बिलासपुर में प्रदर्शन कारियों को गिरफ्तार भी किया गया और काफी देर से  छोड़ा गया. हसदेव जंगल से  छूने वाली मध्यप्रदेश और झारखण्ड की सीमा वर्ती गाँव से भी  लोग प्रीतिरोध सभा में आयेA

कांग्रेस पार्टी के राज्य अध्यक्ष दीपक बैज के पहुंचने पर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा । क्यों कि पिछले पांच साल तक राज्य में कांग्रेस का शासन रहा । आदिवासियों का आरोप है कि उस दौरान फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित करवाईं गई और कांग्रेस ने आंदोलनकारियों द्वारा इन सभाओं को रद्द करने की मांग के बावजूद कुछ नहीं किया । जबकि पूर्व राज्यपाल ने परसा कोल ब्लॉक के प्रभावित गांवों में फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव की जॉंच के आदेश  23 अक्टूबर 2023 को मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ को दे दिये थे।

25 अगस्त 2023 को दिल्ली की पत्रिका संघर्ष  संवाद के पत्रकारों ने हरिहरपुर, में अनिश्चित कालीन धरने के 550 से अधिक दिन होने पर भी, धरना स्थल पर बैठे ग्रामिण आदिवासियों से जब मुलाकात की तो उनहोने कहा कि सरकार द्वारा कोर्ट में एफिडेबिट देने से काम नहीं चलेगा। हसदेव की खदानों को दी गई स्वक्रित्यां निरस्त की जानी चाहिएं।

याद दिला दें कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अतरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हसदेव जंगल में किसी नई कोयला खदान की जरुरत न होने का हलफनामा दिया था .

इससे पहले 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन दुआरा सभी कोल ब्लाक रद्द किये जाने का अशासकीय  संकल्प पूर्ण बहुमत से पारित किया गया था.

2 मार्च से 2022 से जारी धरने के 275 दिन पूरे होने के अवसर पर, 20 दिसम्बर 2022 को हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक एवं सरपंच पतुरियाडांड, उमेश्वर आर्मो ने कहा था कि, राज्य सरकार ने परसा खदान की वन स्वीकृति को निरस्त करने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को पत्र लिखा है और व्यापक जन आक्रोश को संज्ञान में लिया है, लेकिन फर्जी ग्रामसभा और पर्यावरणीय चिंताओं का कोई उल्लेख नहीं किया। वे स्वयं ही अंतिम वन स्वीकृति निरस्त कर सकते है और परसा कोल खदान को रद्द कर सकते है। जब तक हसदेव अरण्य की सभी खदाने आधिकारिक रूप से निरस्त नहीं कि जाती यह आंदोलन सतत चलता रहेगा।

लेकिन इन सब के वावजूद अप्रैल 2023 में  कांग्रेसी सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव जंगल में खनन की अनुमति दे दी

इन्ही बातों  को आदिवासी आंदोलनकारी आज भी दोहराते है

दीपक बेज ने भी मंच से स्वीकार किया की कांग्रेस के शासन के दौरान कुछ गलतियाँ हुयी।

हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन कर रहे ग्रामीण किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने भाजपा-कांग्रेस सभी को हसदेव के मामले में सियासी खेल करने वाला बताया है । प्रदर्शन में शामिल लोगों की शिकायत है कि पार्टियों के नेता यहां आते हैं फोटो खिचाते हैं और चले जाते हैं। सियासी पार्टियों के लगातार आंदोलन में पहुंचने से उनको कोई मदद नहीं मिल पा रही है । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सियासी पार्टियों के आने से उनका आंदोलन कमजोर पड़ सकता है।

वर्तमान में जिस परसा ईस्ट केतेवासन कोयला खनन परियोजना के दूसरे चरण के लिए पेड़ों की कटाई की गई है। वह वन क्षेत्र ग्राम घाट वर्रा के सामुदायिक निस्तार का जंगल था । इस गांव को प्राप्त समुदायिक वन अधिकार पत्र को गैर कानूनी रूप से जिला स्तरीय समिति सरबुजा ने निरस्त किया था । जिसके खिलाफ बिलासपुर उच्च न्यायलय में मामला लम्बीत है। गांव के लोग आगे भी लड़ने के लिए तैयार हैं एवं धरना अभी भी चल रहा है।

 प्रीतिरोध सभा की सारी व्यवस्था आदिवासीयों के द्वारा की गई .ड्रोन से लगातार फोटोग्राफिक निगरानी हुई।

(संदर्भ –छत्तीसगढ़ खबर ,खबर बिलासपुर ,जनचौक,खबर छतीसी ,वर्कर्स यूनिटी ,तीसरी जंग ,सामना ,घटती घटना,फटाफट न्यूज़  )

 पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक 

पानी पत्रक (135- 12 जनवरी  2024) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्रशंकर-7597088300मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



 


गुरुवार, 4 जनवरी 2024

कोर्ट में हलफनामे और सदन में संकल्प के वावजूद

 हसदेव जंगल में कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई शुरू

छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपने 2023  के विधानसभा  चुनाव  घोषणापत्र में हसदेव में कोयला खनन की अनुमति को ‘धोखा’ कहा था. लेकिन सरकार बनते ही संवैधानिक नियम कानून सबको अलग रखकर हसदेव के सरगुजा में पर्सा ईस्ट के कोयला खदान परियोजना के फेज सेकंड में खदानों के लिए पेड़ों की कटाई छत्तीसगढ़  वन विभाग दुआरा शुरू कर दी गयी . इसमें तकरीबन 4.5 लाख के आसपास वन काटे जाएंगे.

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के आलोक शुक्ला का कहना है कि बीते 21 दिसंबर 2023  को परसा ईस्ट केते बासन के दूसरे चरण के कोयला खनन के लिए 91 हेक्टेयर जमीन पर वनों की कटाई शुरू हुई. बिना ग्राम सभा की सहमति के. 500 पुलिस वालों की तैनाती में 500 इलेक्ट्रिक आरा मशीन ने अब तक तकरीबन 30 हजार पेड़ काट दिए. जबकि आधिकारिक आंकड़ा 15 हजार का बताया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन ने दावा किया है कि उसके पास पेड़ काटने के लिए सभी आवश्यक अनुमति थी.

. आदिवासी गांव के सरपंच और नौजवान नेताओं को तीन दिन नजरबंद रखा गया .रायपुर से हसदेव जा रहे छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के स्द्स्यों को भी बीच रास्ते में पुलिस  ने हिरासत में ले लिया गया .

गौर करने वाली बात यह हैं कि राज्य की पिछली कांग्रेसी सरकार के समय में राज्य के वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने  16  जुलाई 2023  को  सुप्रीम कोर्ट में हलफ नामा देकर कहा की हसदेव में किसी नई कोयला खदान की जरुरत नहीं है. और इससे से सम्बंदित समाचार,राज्य के कई प्रमुख अख़बारों जैसे छत्तीसगढ़, टिरायब्लस खबर, हिंदुस्तान टाइम्स ने छापे. हिंदुस्तान टाइम्स का स्क्रीन शॉट निचे दिया जा रहा है ,साथ प्रदेश के एक अख़बार में निकली विस्तृत खबर का भी.


 

इससे भी पहले , छतीसगढ़ विधान सभा में हसदेव छेत्र को खनन मुक्त रखने सम्बन्धी, दिनक 26 जुलाई  2022 , को एक  अशासकीय संकल्प  सर्वसम्मति से पारित हुआ और  जिसका  पालन करने के लिये प्रितिब्द्द होते हुए यह कहा गया क्योकि इस छेत्र की ग्राम सभाओं दुआरा खनन परियोजनाओं को सहमती न देने के मद्देनज़र इस छेत्र में सभी कोल ब्लाक रद्द कियें जाएँ , और इस आशय का , ब्लाक रद्द करने के लिये ,एक पत्र केंद्र की सरकार  को भी लिखा जायेगा . जिसका स्क्रीन शॉट भी यंहा दिया जा रहा है .

16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में वन विभाग छतीस गढ़ राज्य दुआरा गये  हलफनामे में यह भी  कहा गया, “यह रिकॉर्ड में लाना उचित है कि 26 जुलाई 2022 को, छत्तीसगढ़ विधानसभा ने एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया, जिसके द्वारा सदन ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरंड क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों को रद्द करने का संकल्प लिया. छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार से हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द करने का अनुरोध किया ”. 

 छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के आलोक शुक्ल का कहना  कि सदन में संकल्प लेने के बाद तो कुछ कटाई हई लेकिन कोर्ट में हलफ नामा देने के बाद, बिलकुल कटाई नहीं हुयी.

छतीसगढ़ में बीजेपी दुआरा विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों ने 13 दिसम्बर 2023 को शपथ ग्रहण  की और मंत्रिमंडल  का विस्तार करते हुए 9 अन्य विधायकों  ने 22 दिसम्बर 2023  को शपथ ग्रहण की थी . मुख्य्मंत्रि श्री विष्णु देव सायका आदिवासी होना जोर शोर प्रसारित किया गया .

लेकिन आदिवासी मुख्यमंत्री के बिलकुल शुरूआती दिनों में ही आदिवासियों के हितो के विपरीत  और  सदन की मानना  के विरुद्ध जाकर, और कोर्ट के प्रीति प्रितिब्धता न जातते हुए , हसदेव के जंगलों में कटाई २१ दिसम्बर 2023  को शुरू हो गयी विधानसभा का  संकल्प पत्र अभी तक सदन की मार्फत निरस्त नहीं किया गया  और न ही  सुप्रीम कोर्ट में दिए गये हलफनामे को वापिस लिया गया . ऐसे में  कहा जा सकता है कि यह कटाई असंवेधानिक और गैर क़ानूनी है.

 नागरिक प्रितिरोध से जुड़े विभिन्न संगठनों , संस्थाओं ने कटाई रुकवाने के लिये  28 दिसम्बर  2023  को राज्यपाल महोदय को ज्ञापन भी दिया. जिसकी कॉपी उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति और राज्य के नव नियुक्त मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गयीं .


नागरिकों ने हसदेव में पर्सा कोल ब्लाक में वन स्वीकारती हासिल करने के लिये की गयी फर्जी ग्राम सभाओं का भी विरोध किया . तथा राज्य पाल का ध्यान इस और आकर्षित किया है की अगर हसदेव के जंगल उजाड़ कर कोयला  निकालना विकास के लिये जरुरी है तो यह सब गैर क़ानूनी और असंवेधानिक  तरीकों से क्यों किया जा रहा है .क्यों  सरकारें फर्जी ग्रामसभाओं की जाँच से पीछे हट रही है  और हसदेव बचाने के लिये चल रहे आन्दोलन का दमन कर रही है जबकि गैरकानूनी स्वीकारति के खिलाफ हसदेव आदिवासी समुदाय 665 दिनों से लगातार शांति पूर्वक आन्दोलन कर रहा है

ज्ञापन में यह भी  कहा गया है की हसदेव के जंगल छत्तीसगढ़ के फेफड़े हैं . हसदेव नदी और बांगो बंध का केचमेंट हैं ,आदिवासी समुदाय की संस्क्रती और आजीवका इनसे ही जुडी हुई है इसलिय हसदेव के जंगलों का विनाश छत्तीसगढ़ का ही विनाश होगा

हसदेव के  कुल २३ कोयला ब्लॉक्स में से 3 राजस्थान राज्य विधुत उत्पथान निगम लिमिटेड को आवंटित हैं – परसा ईस्ट केते बासन, परसा और केते एक्सटेंशन. आरवीयूएनएल की तरफ से  खान विकासकर्ता और संचालक के रूप में खदान चलाने के लिए अदानी समूह की जिम्मेदारी है.इसलिये इन ब्लॉक्स में अदानी समूह कोयले का खनन आरवीयूएनएल की तरफ से कर रहा है .इनसे निकाले गये कोयले के एकमात्र प्राप्तकर्ता राजस्थान में थर्मल पावर प्लांटस हैं ।

आरवीयूएनएल के पास हसदेव-अरंड कोयला क्षेत्र में जो तीन कोयला ब्लॉक आवंटित हैं उनमें फारेस्ट एरिया नॉन फारेस्ट एरिया से काफी ज्यादा  है ,तीनो ब्लॉक्स का कुल एरिया 5726.32 हेक्ट  है जिसमे से फारेस्ट एरिया 4485.75 है और नॉन फ्फोरेस्ट एरिया 1240.57 हेक्ट है .

इन तीनो ब्लॉक्स में से अभी तक केबल परसा ईस्ट केते बासन नाम की खान में ही खनन (प्रथम चरण ) कर कोयला निकला जा रहा था . बीते 21 दिसंबर 2023 को परसा ईस्ट केते बासन के दूसरे चरण के कोयला खनन के लिए 91 हेक्टेयर जमीन पर वनों की कटाई शुरू हुई. इसमें फारेस्ट एरिया 1898.33 हेक्ट है और नॉन फारेस्ट एरिया 812.71 हेक्ट है   

 इस जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसे वन छेत्रो का उजाड़ना आत्मघाती कदम है ,  छतीसगढ़ बचाओं आन्दोलों से जुड़े संगठनों ने घोषणा की है की आने वाले दिनों में हसदेव को बचाने के लिये हर जिले में प्रदर्शन होंगे साथ ही 7 जनवरी 2024  को हसदेव में नागरिक प्रितिरोध मार्च का आयोजन करने की घोषणा की गयी है .इसमें  प्रदेश और देश  के संवेदनशील नागरिकों और संगठनो को आमंत्रित किया जा रहा है .

( सन्दर्भ – द वायर,डेली छत्तीसगढ़ न्यूज़ ,द प्रिंट ) 

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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

बिना नोटिस सीवर कर्मचारियों को हटाना गैरकानूनी!

 

श्रमिकों को नकद वेतन देना अवैध है!

दिल्ली जल बोर्ड के सैकड़ों सीवर कर्मचारी एकजुट,

दिल्ली सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष ने तत्काल कार्रवाई करने का वादा किया


दिल्ली जल बोर्ड के तहत काम करने वाले दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ों संविदा सीवर कर्मचारियों को पिछले महीनेबिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया गया है। पिछले 10-15 साल से काम कर रहे इनमें से ज्यादातर कर्मचारियों को पिछले 2 महीने से वेतन नहीं दिया गया. इन कर्मचारियों पर शहर के विभिन्न इलाको में  सीवर लाइनों की सफाई की जिम्मेदारी है। अधिकारियों द्वारा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और उन्हें इस महीने अचानक नौकरी से हटा दिया गया। सीवर श्रमिकों की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए, कई यूनियनों और सामाजिक संगठनों ने 28 दिसंबर 2023 को कॉन्स्टि।ट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में एक सार्वजनिक सुनवाई की

पूरी दिल्ली से लगभग 300 कार्यकर्ता सार्वजनिक सुनवाई के लिए एकत्र हुए और जूरी पैनल और दर्शकों के सामने अपनी शिकायतें साझा कीं। श्रमिकों द्वारा दी गई गवाहियों से उनकी कामकाजी परिस्थितियों की चौंकाने वाली वास्तविकताएं सामने आईं। पश्चिमी दिल्ली के पीतमपुरा के श्रमिकों ने कहा कि उन्हें कभी नहीं बताया गया कि उनका सही वेतन क्या है और पर्यवेक्षक द्वारा बिना किसी रसीद के उन्हें नकद भुगतान किया जाता है । एक कर्मचारी, जिसने अपना नाम नहीं बताना चाहा , ने कहा, "हम 15 वर्षों से काम कर रहे हैं, कई ठेकेदार आते हैं और चले जाते हैं  लेकिन हमें अपनी 450 रुपये की दैनिक मजदूरी के लिए लड़ना पड़ता है! " नवजीवन विहार में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें दिवाली और दशहरे के महीने में भी वेतन नहीं मिला और उनका परिवार तब से कर्ज लेकर गुजारा कर रहा है.

 दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी के एक कर्मचारी ने कहा कि उसे बिना किसी पूर्व सूचना के 7 दिसंबर को अचानक नौकरी से हटा दिया गया और कारण भी नहीं बताया गया । एक अन्य मामले में, ईदगाह स्टोर के एक कर्मचारी ने वेतन न मिलने पर सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद उसे नौकरी से हटा दिया गया और तब से किसी भी ठेकेदार ने उसे काम पर नहीं रखा है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी डराने-धमकाने की रणनीति का इस्तेमाल किया जाता है जो श्रमिकों को अपनी चिंताओं को व्यक्त करने से रोकता है।

  जूरी में शामिल दिल्ली सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष संजय गहलोत ने श्रमिकों की दुर्दशा के मुद्दों का संज्ञान लिया और आश्वासन दिया कि वह बकाया भुगतान जारी करने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सीवर श्रमिकों की नौकरियां सुरक्षित रहें।

 सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील, कॉलिन गोंसाल्वेस, जो जूरी पैनल का हिस्सा थे, ने श्रमिकों से कहा, “बिना नोटिस के आपको हटाना अवैध है! आपका वेतन नकद में देना गैरकानूनी है ! आपको आपका पूरा वेतन न देना गैरकानूनी है!”

 जूरी पैनल में सुप्रीम कोर्ट के वकील कॉलिन गोंसाल्वेस, पूर्व संसद सदस्य और एआईकेएस के उपाध्यक्ष हन्नान मोल्ला, राज्य स्तरीय आश्रय निगरानी समिति के सदस्य इंदु प्रकाश सिंह शामिल रहे ; सीटू के राष्ट्रीय सचिव अमिताव गुहा; दिथी भट्टाचार्य, सेंटर फॉर वर्कर्स मैनेजमेंट के निदेशक अनिल वर्गीस, सामाजिक कार्यकर्ता व  अध्यक्ष, निगरानी समिति, दिल्ली उच्च न्यायालय, अधिवक्ता हरनाम सिंह, और मीना कोटवाल, संस्थापक संपादक, द मूकनायक ने 15 श्रमिकों की गवाही सुनी और निम्नलिखित सिफारिशें दीं:

 1. सभी संविदा सीवर कर्मचारियों की बहाली और वेतन, भविष्य निधि और अन्य सामाजिक प्रतिभूतियों सहित सभी लंबित बकाया का यथा शीघ्र भुगतान।

2. अकुशल श्रमिकों के लिए दिल्ली सरकार की न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना ( 1 अक्टूबर 2022 ) के अनुसार, श्रमिकों को कम से कम ₹ 17,494/- प्रति माह न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए।

3. दिल्ली जल बोर्ड के 700 संविदा कर्मियों को नियमित करने के आम आदमी पार्टी सरकार के प्रयास की सराहना करते हुए, सिफारिश की गयी कि 240 दिनों से अधिक काम करने वाले सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए और समय समय पर रोजगार में अंतराल को दिखावा और फर्जी माना जाना चाहिए।

4. रिट याचिका (सिविल) 5232/2007 के अदालती आदेशों का अक्षरशः कार्यान्वयन । साथ ही मृत्यु के मामले में ₹30 लाख की अनुग्रह राशि के भुगतान की सिफारिश करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 20/10/2023 के आदेशों का कार्यान्वयन । जूरी ने यह भी सिफारिश की है कि मुआवजा बिना किसी देरी के तुरंत दिया जाए।

5. सभी क्षेत्रों के सभी श्रमिकों के लिए ई एस आई और पहचान पत्र दिए जाएँ

6. शिक्षण संस्थानों में सीवर श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति का प्रावधान हो

 यूनियन नेताओं ने इन सिफारिशों के साथ  29 दिसम्बर 2023 को दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ से संपर्क करने का फैसला किया है और कर्मचारियों ने तब तक दिल्ली जल बोर्ड वरुणालय में इकट्ठा होने का फैसला किया है जब तक उन्हें उनका उचित वेतन नहीं दिया जाता और उनकी नौकरियां वापस नहीं दी जातीं।

 जनसुनवाई का आयोजन दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM) द्वारा नगरपालिका श्रमिक लाल झंडा यूनियन (सीटू), दिल्ली जल बोर्ड सीवर विभाग मजदूर संगठन, ऑल डीजेबी कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन, जल मल कामगार संघर्ष मोर्चा, दिल्ली जल जैसी यूनियनों के सहयोग से किया गया था। इनके अलावा  बोर्ड कर्मचारी संघ, नेशनल कैंपेन फॉर डिग्निटी एंड राइट्स ऑफ सीवरेज एंड अलाइड वर्कर्स (एनसीडीआरएसएडब्ल्यू) और पीपल्स मीडिया एडवोकेसी एंड रिसोर्स सेंटर (पीएमएआरसी), सीवरेज एंड अलाइड वर्कर्स फोरम (एसएसकेएम, विमर्श मीडिया और मगध फाउंडेशन) जैसे संगठन भी शामिल रहे

( वेव पोर्टल groundxero में आये समाचार का हिंदी में अनुवाद,सहमती से प्रकाशित )

 पानी से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक   पानी पत्रक (133-30 दिसम्बर 2023) जलधारा अभियान, 221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020,संपर्क-उपेन्द्रशंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



पेरिस समझौते के बाद पर्यावरण पर भारत की संसद में चर्चा

( तस्वीर , 1अक्टूबर 2026 को, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया,नई दिल्ली में "क्लाइमेट ऑन द फ्लोर: इंडियाज़ पार्लियामेंट्री डिस्कोर्स ऑन एनवायरनमेंट...