बुधवार, 22 जनवरी 2025

बिहार के मुख्यमंत्री ने अपनी प्रगति यात्रा में कोशी की बाढ़ और पीड़ितों को भुला दिए

[ तटबंध के भीतर के कटाव पीड़ितों को बसाने सहित अन्य मांगों पर कोशी नव निर्माण मंच शुरू करेगा चरणबद्ध आंदोलन. 30 जनवरी 2025 को समाहरणालय के समक्ष होगा धरना कोशी नव निर्माण मंच]

 प्रगति यात्रा पर सुपौल आए  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोशी  की बाढ़ और पीड़ितों को भुला गए। उनके जख्मों पर मरहम लगाना या कोशी की कटाव में उजड़े लोगों को बसाने की बात करना तो दूर जिनके घर नदी में समा गए है उनको गृहक्षति की राशि नहीं मिलने की बात भी उनको याद नहीं रही जबकि वे ही कहते है कि सरकारी खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार  है। भला कोशी के भीतर के लाखों लोगों की उपेक्षा कर जिले की प्रगति कैसी होगी ?

  (कोशी के भीतर के गांव बेला, पांचगछिया में मुख्यमंत्री जी यात्रा के सम्बन्ध में चर्चा की गयी)

उक्त बातें कोशी नव निर्माण मंच द्वारा कोशी के भीतर के गांव बेला, पांचगछिया में मुख्यमंत्री जी यात्रा के सम्बन्ध में की गयी चर्चा के दौरान बताईं गयीं, और बताया गया कि इस साल की बाढ़ कोशी के इतिहास में एक बड़ी बाढ़ थी जिसके तबाही और लोगों की पीड़ा के वर्णन के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। आज भी कोशी पूर्वी तटबंध की रक्षा के लिए बने अनेक स्पर क्षत-विक्षत दिखते है। यह बाहर के सुरक्षित मान चुके लोगों के लिए भी बड़ा सवाल है। ग्लोबल वार्मिंग की तरफ बढ़ चुकी दुनिया के हिमालय में होने वाली घटनाओं का पहला प्रभाव कोशी तटबंध के भीतर के लोगों पर पड़ेगा ऐसे जीवंत सवालों के बाबजूद भी मुख्यमंत्री ने कोई बात नहीं की ।

कोशी की प्रचंड बेग में जिनके घर नदी में समा गए उनको तो तत्काल गृहक्षति मिलनी थी परंतु वह राशि आज भी नहीं मिली है। बाढ़ के बाद सरकार द्वारा बनाए गए मानक संचालन प्रक्रिया और मानदर के तहत वस्त्र वर्तन के 2000 और 1800 रुपए किसी बाढ़ पीड़ित को नहीं मिला, जिनके मॉल मवेशी बह गए उसकी क्षतिपूर्ति नहीं दी गई, जीआर के वंचित लोग आज भी आस देख रहे है।

           (गांव बेला, पांचगछिया में बात रखती एक महिला  )

 पुनर्वास स्थलों की एकड़ की एकड़ जमीन अस्थाई बंदोबस्ती में एक एक साल के लिए दी जाती है परंतु कटाव पीड़ित आज भी कोशी में कटने के बाद तटबंध पर शरण लिए है या इधर उधर भटक रहे है कोई उनकी सुधी नहीं लेता।  प्रगति यात्रा में उम्मीद थी कि उनको बसाने की बातें भी होंगी पर नहीं हुई। जिला प्रशासन अपनी नाकामी तो छुपा लिया पर इस आयोजन में शामिल जिले के सभी जनप्रतिनिधि इस बात को मुख्यमंत्री के समक्ष नहीं रखे। इससे कोशी के लोग निराश है।

इस उपेक्षा के खिलाफ कोशी नव निर्माण कोशी के लोगों को नए सिरे से संगठित करते हुए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की रणनीति बना रहा है।

कटाव पीड़ितों को गृहक्षति दिलाने और उन्हें बसाने के सवाल पर आगामी 30 जनवरी को सुपौल में धरना के साथ इसकी शुरुआत करेगा।

 (सन्दर्भ /साभार--कोशी नव निर्माण मंच के इंद्र नारायण सिंह, राहुल यादुका, अर्चना सिंह, राजेश मंडल और महेंद्र यादव द्वारा संयुक्त रूप से जारी- 22 जनवरी, सुपौल )

पानी पर्यावरण से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक

पानी पत्रक ( 206– 22 जनवरी 2025) जलधारा अभियान221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020, संपर्क-उपेन्द्रशंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



  

रविवार, 19 जनवरी 2025

नर्मदा क्रूज प्रोजेक्ट से जलीय जैव और मछलियों की विविधता नष्ट होगी , पानी की गुणवत्ता पर भी असर - नर्मदा बचाओ आन्दोलन

 ( मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा नर्मदा क्रूज प्रोजेक्ट के लिए अवैध टेंडर जारी.

अमीरों के पर्यटन से नर्मदा नदी का पेयजल अधिक प्रदूषित होगा.

स्वास्थ्य सिंचाई मत्स्यव्यवसाय पर आघात, हरित न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन नामंजूर-नर्मदा बचाओ आन्दोलन )

                                        

                 ( नर्मदा नदी में,धार जिले के मेघनाथ घाट, पर क्रूज में पर्यटकों को बिठाने के लिए फ्लोटिंग जेटी ) 

 एक चिंताजनक और विवादास्पद कदम लेते हुए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने नर्मदा पर लग्जरी क्रूज प्रोजेक्ट के तहत मेघनाथ घाट, जिला धार में नदी क्रूज टर्मिनल के निर्माण और विकास कार्यों के लिए 7.82 करोड रुपए का टेंडर जारी किया है। इसमें जुड़े कार्यों से लागत में और भी बढ़ोतरी होनी है। यह कदम न केवल स्थापित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करता है बल्कि नदी की पारिस्थिति की, पेयजल और उस पर निर्भर समुदायों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न करता है! यह बात केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट से, 2022 में हरित न्यायाधिकरण में प्रस्तुत करने पर, जनता के सामने आ चुकी है।

पृष्ठभूमि

2022 में घोषित यह प्रस्तावित क्रूज प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के बड़वानी से गुजरात के केवड़िया के बीच 135 किलोमीटर की दूरी को कवर करेगा यह जाहीर था | कभी ओकारेश्वर से चलाना घोषित किया और अब मेघनाथ घाट, कुक्षी से! इस प्रोजेक्ट के तहत हजारों रुपए से लाख रुपए तक की टिकट से सफारी करने वाले अमीर पर्यटकों के लिए शराब का बार, स्विमिंग पूल, वॉटर स्पोर्ट्स और फ्लोटिग जेटी जैसी सुविधाओं से लेंस लग्जरी और बजट क्रूज शुरू करने की योजना है। नर्मदा नदी किनारे पर्यटकों के लिए रिसोर्ट याने होटल्स बनाने की बात भी जाहिर कर रहे हैं। हालांकि, इस परियोजना का सामना शुरू से ही कानून, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों से होता रहा है।

स्थानीय लोगों की चिताओं और कानूनी याचिकाओ के जवाब में, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने 2022 और सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2024 में इस परियोजना के खिलाफ फैसला सुनाया क्रूज नर्मदा जेसे जलाशय में चलाना मना किया है| अदालतो ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन चिन्हित किया :

वायु, जल संरक्षण कानून, 1974, 1981

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

वेटलैंड प्रबंधन नियम, 2017

जैव विविधता अधिनियम, 2002

इन निर्णयों ने पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव के मूल्यांकन की अनुपस्थिति को उजागर किया और नर्मदा नदी और उस पर निर्भर समुदायों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया | साथ ही नर्मदा नदी और सरदार सरोवर बांध से संबंधित 1979 से जारी नर्मदा ट्रीब्यूनल के फैसले का भी उल्लंघन हो रहा है और होगा।

नया टेंडर : कानून और विश्वास का उल्लंघन

इन फेसलो के बावजूद, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने अवैध परियोजना के संचालित करने के लिए बोली आमंत्रित करते हुए 19/ 12/ 2024 से एक टेंडर जारी किया है | यह कदम न केवल न्यायिक निर्णयों की अनदेखी करता है बल्कि पर्यावरण और समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनी ढांचे को भी कमजोर करता है| इस परियोजना से नर्मदा घाटी की संस्कृति और प्रकृति बर्बाद होगी, यह पर्यावरण के विशेषज्ञ से भी जाहिर है।

टेंडर से जुडी मुख्य समस्याए

1. नर्मदा पर बड़े क्रूज /जहाजों की शुरुआत नर्मदा घाटी के नाजुक पारिस्थितिकीय तंत्र के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है| इन जहाजों से ईंधन रिसाव, कचरे का निस्तारण और जल तथा हवा के प्रदूषण का खतरा बढ़ता है, जिससे नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित होती है, जो कि स्थानीय समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन और जीने का आधार है। इसके अतिरिक्त, क्रूज के संचालन से जलीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा, जिसमें मछलियों की प्रजातिया शामिल है जो परिस्थितियों को संतुलन बनाए रखने तथा नदी पर निर्भर लोगों के जीवन- यापन के लिए आवश्यक है।

2. स्थानीय समुदायों पर प्रभाव भी उतना ही चिंताजनक है। पीने के पानी के स्त्रोतों का प्रदूषण घाटी के ग्रामीण तथा शहरी निवासियों के स्वास्थ्य पर, खेती, जंगल पर भी आघात करेगा । नर्मदा पर निर्भर पारंपरिक मछुआरा समुदाय अपनी जीविका को लेकर गंभीर खतरे का सामना कर रहा है, जो पूरी तरह से मछली पकड़ने से संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है| इन समुदायों का संभावित विस्थापन, उनकी सामाजिक -आर्थिक समस्याओं को और गहरा करता है, जिससे पहले से ही डूब ग्रस्त आबादी और अधिक हाशिये पर चली जाती है।

3. इसके अलावा, इस टेंडर का जारी होना अदालत की अवमानना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है | परियोजना को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ( NGT) का 2022 के और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी 2024 के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करती है, जिनमे यह क्रूज परियोजना को रोकने का निर्देश दिया गया था | न्यायिक निर्णयों की इस प्रकार से अनदेखी करने वाली प्रशासन, जवाबदेहीता और असस्वैधानिक, गैर कानूनी शासन के प्रति गंभीर चिंताएं पैदा करती है।

अस्थिर विकास का एक व्यापक मुद्दा है

यह परियोजना उस चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिसमें आर्थिक विकास की पारिस्थितिक स्थिरता और समुदायिक कल्याण की कीमत पर प्राथमिकता दी जाती है | पर्यटन और बुनियादी ढांचे की परियोजनाए अक्सर अपनी लागतों को बाहरी करती है, जिसमें दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षरण और सामाजिक अन्याय होता है| लाखों लोगों की जीवनरेखा रही नर्मदा नदी अब मुनाफा - उन्मुख गतिविधियों के लिए एक वस्तु बनने की जोखिम में है। आदिवासी क्षेत्र होते हुए, ग्राम सभाओं की सहमति के बिना उनके जीवनाधार पर आघात, "पेसा"कानून का उल्लंघन है| विकास के नाम पर विस्थापन, विनाश आगे बढ़ेगा !

कार्यवाही के द्वारा न्याय पूर्ण मांग

हम मांग करते हैं कि " मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग " तुरंत टेंडर को वापस ले और नर्मदा नदी की सुरक्षा से जुड़े न्यायिक निर्णय के सम्मान करें| इसके अलावा,

इस बात की स्वतंत्र जांच हो कि कानूनी प्रतिबंधो के बावजूद यह टेंडर कैसे जारी किया गया।

पर्यावरण संरक्षण कानूनों का कडाई से पालन और भविष्य की भी परियोजना के लिए व्यापक, सामाजिक, पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन शर्त है, उसका पालन हो।

स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए ताकि उनके अधिकारों चिताओं को समाधान किया जा सके | "पैसा" कानून और ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान हो।

नर्मदा नदी अनगिनत समुदायों के लिए जीवन, आजीविका और विरासत का प्रतीक है| इस पवित्र नदी की सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जो की राजनीतिक और आर्थिक हितों से परे होनी चाहिए | नर्मदा घाटी की जनता का पेयजल, स्वास्थ्य, आजीविका की सुरक्षा, शासन का और जन प्रतिनिधियों का कर्तव्य है, यह ध्यान में रखा जाए।

( सन्दर्भ /साभार - नर्मदा बचाओ आन्दोलन और एन ए पी एम का प्रेस नोट – 13 जनुअरी 2025 

संपर्क -- गोखरू सोलंकी श्यामा मछुआरा, कैलाश यादव, मेधा पाटकर

एवं राहुल यादव- 9179617513, हेमेंद्र सिंह मंडलोई- 8839295 )

पानी पर्यावरण से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक

पानी पत्रक ( 205–18 जनवरी 2025) जलधारा अभियान221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020, संपर्क-उपेन्द्रशंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



 

 

  

मंगलवार, 14 जनवरी 2025

आर्कटिक टुंड्रा अब भंडारण से ज़्यादा CO2 उत्सर्जित कर रहा है

 हज़ारों सालों तक जमी हुई मिट्टी में कार्बन डाइऑक्साइड जमा करने के बाद, आर्कटिक टुंड्रा लगातार जंगल की आग की वजह से वायुमंडल में कार्बन के एक समग्र स्रोत में तब्दील हो रहा है 

                  
पश्चिमी आर्कटिक कैरिबू झुंड से कैरिबू का एक समूह, सेलाविक राष्ट्रीय वन्यजीव अभयारण्य के भीतर, अलास्का के सेलाविक और एंबलर गांवों के बीच एक शीतकालीन मार्ग पर यात्रा करता है। झुंड यहां से होकर प्रवास करता है और कभी-कभी यहां शीतकाल भी बिताता है। (छवि सौजन्य: लिसा हूप/यूएसएफडब्ल्यूएस)

कार्बन सिंक से कार्बन स्रोत में आर्कटिक का परिवर्तन आर्कटिक में होने वाले नाटकीय परिवर्तनों में से एक है, जिसे यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा प्रकाशित 2024 आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड में दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन पौधों, वन्यजीवों और उन पर निर्भर लोगों को तेज़ी से गर्म, गीले और कम निश्चित दुनिया के अनुकूल होने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

आर्कटिक टुंड्रा, जो गर्म हो रहा है और जंगल की आग में वृद्धि का सामना कर रहा है, अब अपने भंडार से ज़्यादा कार्बन उत्सर्जित कर रहा है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और खराब कर देगा। यह जीवाश्म ईंधन प्रदूषण को तेज़ी से कम करने की ज़रूरत का एक और सबूत है।

आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड की मुख्य संपादक और नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर की उप-मुख्य वैज्ञानिक ट्विला मून ने कहा, "इस वर्ष की रिपोर्ट जलवायु परिस्थितियों में तेज़ी से हो रहे परिवर्तन के कारण अनुकूलन की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है।" "स्वदेशी ज्ञान और समुदाय-नेतृत्व वाले शोध कार्यक्रम आर्कटिक में तेज़ी से हो रहे परिवर्तनों के प्रति सफल प्रतिक्रियाओं की जानकारी दे सकते हैं।"

रिपोर्ट कार्ड की मुख्य बातें

 हवा में

 आर्कटिक की वार्षिक सतही हवा का तापमान 1900 के बाद से दूसरा सबसे गर्म स्थान पर रहा।

 • 2023 की शरद ऋतु और 2024 की गर्मियों में आर्कटिक में विशेष रूप से गर्मी रही, तापमान क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे गर्म स्थान पर रहा ।

             
बढ़ी हुई वन्य अग्नि गतिविधि के प्रभाव को शामिल करने पर, आर्कटिक टुंड्रा क्षेत्र मिट्टी में कार्बन भंडारण से कार्बन डाइऑक्साइड का स्रोत बन गया है। 2003 से अब तक ध्रुवीय वन्य अग्नि से प्रति वर्ष औसतन 207 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन हुआ है। आर्कटिक भी लगातार मीथेन का स्रोत बना हुआ है। (छवि सौजन्य: NOAA)

अगस्त 2024 की शुरुआत में हीटवेव ने उत्तरी अलास्का और कनाडा के कई समुदायों में दैनिक तापमान का सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया।

 पिछले नौ साल आर्कटिक में रिकॉर्ड किए गए नौ सबसे गर्म साल रहे हैं।

आर्कटिक में 2024 की गर्मियों में रिकॉर्ड सबसे ज़्यादा बारिश हुई।

 आर्कटिक वर्षा में 1950 से 2024 तक वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई है, जिसमें सबसे अधिक वृद्धि सर्दियों में हुई है।

समुद्र में

सितंबर 2024 में, समुद्री बर्फ की मात्रा, जिसका आर्कटिक पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है, 45 साल के सैटेलाइट रिकॉर्ड में छठी सबसे कम थी।

सितंबर में बर्फ की सबसे कम मात्रा के सभी 18 मामले पिछले 18 सालों में हुए हैं।

अगस्त में बर्फ रहित आर्कटिक महासागर क्षेत्र 1982 से हर दशक में 0.5°F (0.3°C) की दर से गर्म हो रहे हैं।

आर्कटिक महासागर के आसपास के ज़्यादातर उथले समुद्रों में, अगस्त में समुद्र की सतह का औसत तापमान 1991-2020 के औसत से 3.6-7.2°F (2-4°C) ज़्यादा गर्म था, हालाँकि चुकची सागर औसत से 1.8-7.2°F (1-4°C) ठंडा था।

• 2003-24 के अवलोकन रिकॉर्ड के दौरान, प्रशांत आर्कटिक को छोड़कर, सभी आर्कटिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक महासागर प्राथमिक उत्पादकता-प्लवक खिलना (plankton blooms) -बढ़ना जारी है । हालाँकि, 2024 में, आर्कटिक के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम मूल्य प्रमुख थे।

प्रशांत आर्कटिक में आइस सील की आबादी स्वस्थ बनी हुई है, हालाँकि रिंग्ड सील का आहार गर्म पानी के साथ आर्कटिक कॉड से केसर कॉड में बदल रहा है।

भूमि पर

बढ़ी हुई जंगली आग की गतिविधि के प्रभाव को शामिल करते हुए, आर्कटिक टुंड्रा क्षेत्र मिट्टी में कार्बन के भंडारण से कार्बन डाइऑक्साइड का स्रोत बन गया है । 2003 से सर्कम्पोलर वाइल्डफ़ायर उत्सर्जन औसतन 207 मिलियन टन प्रति वर्ष कार्बन रहा है।

ड्रोन से लिए गए दृश्य में रूस के साइबेरिया के उत्तरपूर्वी भाग में स्थित साखा गणराज्य (जिसे याकूतिया के नाम से भी जाना जाता है) के एक वन क्षेत्र के ऊपर जंगल में लगी आग से उठता धुआं दिखाया गया है। फोटो: रॉयटर्स

आर्कटिक लगातार मीथेन का स्रोत बना हुआ है।

अलास्का पर्माफ्रॉस्ट का तापमान रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे गर्म रहा ।

गर्म तापमान कारिबू की गतिविधियों और जीवित रहने पर सीधा असर डालता है, क्योंकि गर्मियों में गर्मी और सर्दियों में बर्फ और बर्फ की स्थिति में बदलाव होता है, जिससे जनसंख्या में गिरावट और सुधार में क्षेत्रीय भिन्नता होती है।


चित्र में दिखाया गया है कि पिछले 2-3 दशकों में प्रवासी आर्कटिक टुंड्रा कारिबू की आबादी में 65% की गिरावट आई है। गर्म तापमान, शीतकालीन बर्फबारी में परिवर्तन, तथा बढ़ते मानव पदचिह्न आर्कटिक कारिबू पर दबाव डालते हैं, जिससे उनके वितरण, आवागमन, अस्तित्व और उत्पादकता में परिवर्तन होता है। श्रेय: NOAA Climate.gov

आर्कटिक प्रवासी टुंड्रा कारिबू की आबादी में पिछले 2-3 दशकों में 65% की गिरावट आई है। जबकि पश्चिमी आर्कटिक के आम तौर पर छोटे तटीय झुंडों ने पिछले दशक में कुछ सुधार देखा है, पहले बड़े अंतर्देशीय झुंडों में दीर्घकालिक गिरावट जारी है और स्वदेशी बुजुर्गों द्वारा बताई गई सबसे कम आबादी पर बने हुए हैं।

अगले 25-75 वर्षों में कारिबू झुंडों पर गर्मी के प्रभाव बढ़ने का अनुमान है, जिसके लिए प्रबंधन रणनीतियों के लिए वैज्ञानिकों और उत्तरी समुदायों के बीच साझा ज्ञान की आवश्यकता है।

• 2023-24 की सर्दियों के दौरान बर्फ का संचय यूरेशियन और उत्तरी अमेरिकी आर्कटिक दोनों में औसत से अधिक था।

औसत से अधिक बर्फ संचय के बावजूद, मध्य और पूर्वी आर्कटिक कनाडा के कुछ हिस्सों में बर्फ का मौसम 26 वर्षों में सबसे छोटा था। आर्कटिक में बर्फ पिघलना मई और जून के दौरान ऐतिहासिक स्थितियों की तुलना में 1-2 सप्ताह पहले हो रहा है।

ग्रीनलैंड आइस शीट का द्रव्यमान (mass loss ) नुकसान 2013 के बाद से सबसे कम है।

टुंड्रा ग्रीननेस, तापमान में वृद्धि के कारण झाड़ी कवर के विस्तार का एक उपाय, 25 साल के उपग्रह रिकॉर्ड में दूसरे स्थान पर है।

स्वदेशी ज्ञान और भागीदारी

स्वदेशी शिकारी अपने इलाके के मूल शोधकर्ता हैं, जिनके पास पारंपरिक प्रथाओं के अभिन्न इंटीग्रल अवलोकन और निगरानी कौशल हैं।

कनाडा के नुनावुत के कांगिकटुगापिक (क्लाइड नदी) में इटाक हेरिटेज एंड रिसर्च सेंटर, अंगुनासुक्तित (Angunasuktiit) कार्यक्रम संचालित करता है, जो नई पीढ़ियों को पारंपरिक शिकार और कटाई सिखाता है।

आर्कटिक अनुसंधान में स्वदेशी नेतृत्व का समर्थन करने के लिए स्वदेशी/ स्थानीय जीवन शैली और ज्ञान सृजन को निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक दर से चार गुना अधिक गर्म हो रहा है।यह लगातार 11वां वर्ष है जब आर्कटिक के तापमान में वृद्धि वैश्विक औसत से अधिक रही।

वुडवेल क्लाइमेट की वैज्ञानिक सू नटाली इस अध्ययन के शोधकर्ताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा "इस संकट का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए हमें सटीक, समग्र और व्यापक जानकारी की आवश्यकता है कि जलवायु परिवर्तन आर्कटिक में कार्बन की मात्रा को कैसे प्रभावित करेगा और कितना कार्बन संग्रहीत करेगा, तथा कितना कार्बन वायुमंडल में वापस छोड़ेगा।"

( सन्दर्भ/साभार –National oceanic and atmospheric administration, Asia financial, climate and capitalism )

पानी पर्यावरण से संबंधित सूचनाओ,समाचारों और सन्दर्भों का संकलन –पानी पत्रक

पानी पत्रक ( 204 – 14 जनवरी 2025) जलधारा अभियान221,पत्रकार कॉलोनी,जयपुर-राजस्थान,302020, संपर्क-उपेन्द्रशंकर-7597088300.मेल-jaldharaabhiyan.jaipur@gmail.com



 

 

 

  

संयुक्त किसान मोर्चा, नें लिंगराज आज़ाद की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की

* ओडिशा में किसानों के विरोध प्रदर्शन पर दमन का एसकेएम द्वारा प्रतिवाद* * भूमि अधिकारों के संघर्ष का नेतृत्व करने के लिए 25 मार्च 2026 से ...